Mera sai nath

मैं हूँ मजबूर मेरे हाथ बंधे
मैं हूँ मजबूर मेरे हाथ बंधे, होंठ सिले.. .2

पत्ता-पत्ता भी यहाँ का वो हिलाए,तो
हिले ..2

मेरे साई से है सिर्फ एक तमन्ना मेरी .
मुझे कुछ होश ना हो फिर भी मुझे आन
मिले ..2

पत्ता-पत्ता भी .....

तेरे पास आके में दुनिया के सितम भूल गया .2

ये भी तेरा करम दिल में है शिकवे ना गिले ..2

पत्ता-पत्ता भी .....

मैं ने हर हाल में खामोश इबादत की है .2

मैं ने मांगे हैं कहाँ अपनी वफाओ के सिले ..2

पत्ता-पत्ता भी .....

एक दिन धूप जला देगी हर इक पत्ती को .2

नासमझ बनके अगर फुल को खिलना है,
खिले ..

पत्ता-पत्ता भी .....

|| श्री साईंनाथ महाराज की जय ||

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